रांची :। महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अपील पर मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जेएसएससी का आग्रह स्वीकार करते हुए एकल पीठ के आदेश पर लगी रोक को 27 अक्टूबर तक बढ़ा दिया। मामले की अगली सुनवाई भी इसी तारीख को होगी।
जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत से एकल पीठ के आदेश पर लगी रोक को जारी रखने का आग्रह किया। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से इसका विरोध करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई।
दरअसल, जेएसएससी ने न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ द्वारा आकांक्षा कुमारी एवं अन्य के मामले में 15 मई 2026 को पारित आदेश को खंडपीठ में अपील के माध्यम से चुनौती दी है। पूर्व में खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई थी, जिसकी अवधि मंगलवार को समाप्त हो रही थी। आयोग के आग्रह पर अदालत ने रोक की अवधि बढ़ा दी।
मामला महिला सुपरवाइजर नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द किए जाने से जुड़ा है। जेएसएससी ने दस्तावेज सत्यापन के दौरान शैक्षणिक योग्यता में त्रुटि का हवाला देते हुए कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ आकांक्षा कुमारी एवं अन्य ने हाई कोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की थी।
एकल पीठ ने जेएसएससी द्वारा अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था।
एकल पीठ में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई थी कि महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए जारी विज्ञापन और नियुक्ति नियमावली में समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और गृह विज्ञान में तीन वर्षीय ऑनर्स डिग्री को अनिवार्य नहीं किया गया था। प्रार्थियों के अनुसार नियुक्ति के लिए इन तीनों विषयों के साथ स्नातक होना आवश्यक था और उन्होंने स्नातक स्तर पर इन विषयों की पढ़ाई की है।
प्रार्थियों की ओर से यह भी कहा गया था कि उन्होंने इन विषयों में अलग-अलग ऑनर्स डिग्री नहीं ली है, लेकिन स्नातक की पढ़ाई के दौरान दो वर्षों तक तीनों विषयों का अध्ययन किया है। इसी आधार पर उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग की थी।
