रामगढ़ : जिंदगी भर मेहनत कर जिस बेटे को इंजीनियर बनाया। बड़े धूमधाम से इंजीनियर बहू को घर लाए। दशहरे में बेंगलुरु से बेटे बहु खुशियां बांटने हजारीबाग आ रहे थे। चक्रवर्ती परिवार खुशी से झूम रहा था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि चुट्टूपालू घाटी उनके परिवार की खुशियों को निगलने वाला है। जिस बेटे और बहू को घर लाने के लिए माता-पिता रांची निकले थे, किसे पता था कि घर लौटने का उनका सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। रविवार की रात चुटूपालू घाटी में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पलभर में उजाड़ दिया। कंटेनर की टक्कर से बलेनो कार सवार पिता, बेटे और बहू की मौत हो गई, जबकि मां और कार चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हृदयविदारक घटना से हर किसी की आंखें नम हैं।
हजारीबाग शहर के मिशन स्कूल रोड स्थित सैंडवेल नर्सिंग होम के समीप रहने वाले 70 वर्षीय प्रिमांशु चक्रवर्ती भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से सेवानिवृत्त थे। रविवार को वह अपनी 60 वर्षीय पत्नी रीना चक्रवर्ती के साथ बेंगलुरु से आए अपने 35 वर्षीय बेटे प्रियांशु चक्रवर्ती और बहू प्रोनाई चक्रवर्ती (32) को लेने रांची गए थे। परिवार को साथ लेकर हजारीबाग लौटते समय चुटूपालू घाटी में उनकी कार हादसे का शिकार हो गई।
रामगढ़-रांची लेन पर एक कंटेनर ने उनकी बलेनो कार को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि पिता, बेटे और बहू की जान चली गई। पत्नी रीना चक्रवर्ती और कार चालक राजू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। जिस घर में बेटे-बहू के आने से खुशियां लौटने वाली थीं, वहां अब मातम पसरा है।
यह हादसा केवल तीन जिंदगियों का अंत नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों और खुशियों का भी बिखर जाना है। बेटे-बहू को घर लाने निकले पिता का अपने परिवार के साथ लौटने का सपना चुटूपालू घाटी में हमेशा के लिए टूट गया। हादसे की खबर ने हजारीबाग में शोक की लहर पैदा कर दी।
